November, 2025: ओडिशा के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र, सुंदरगढ़ जिला के लांझीबेरना पंचायत में 13 दिसंबर की रात को डालमिया सीमेंट कंपनी द्वारा जबरन खेती जमीन खोदाई की गई।
खनन में न्याय नेटवर्क
17 दिसम्बर, 2025
इस बैठक के मुख्य उद्देश:
1. विभिन्न क्षेत्रों में हो रहे खनन, जमीन/जंगल अधिग्रहण अथवा के मुद्दों पर जानकारी साझा करना
2. इन मुद्दों पर एकजुटता बनकर कार्य नीति पर तय करना
3. रांची में फरवरी -मार्च के महीने में "निजीकरण, खनन और समुदायों/पृथ्वी की बिगड़ती सेहत" पर राष्ट्रीय सम्मेलन पर तिथि, एजेंडा और आयोजन की तैयारी पर चर्चा करना।
साथियों ने निम्नलिखित मुद्दे साझा किया:
1.ओडिशा के पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र, सुंदरगढ़ जिला के लांझीबेरना पंचायत में 13 दिसंबर की रात को डालमिया सीमेंट कंपनी द्वारा जबरन खेती जमीन खोदाई की गई। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने लगातार 4- 5 साल से डालमिया का विरोध किया है और ग्राम सभा सहमति नहीं हुई है। अन्य पंचायत खंडहर और बिझहन में भी अडानी और रोंगटा जैसे कंपनियों द्वारा डोलोमाइट और अन्य खनिज के लिए गांव विस्थापित का खतरा है। अदानी द्वारा लगभग 609 हेक्टेयर में खनन होगा जिसमें 4 गांव विस्थापित होंगे और जंगल उजड़ेंगे। आदिवासी निरंतर विरोध कर रहे लेकिन, इन राजकीय और राष्ट्रीय सरकारों से कोई सहायता नहीं मिल रही। वहीं, पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के रखवाले- राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपति मुर्मू को भी पत्र लिखा गया है लेकिन कोई करवाई नहीं हुई है।
2. ओडिशा के मलकानगिरी जिले में गैर-आदिवासी समुदाय द्वारा की गई संदिग्ध हिंसा में एक 55 वर्षीय महिला का सिर काट दिया गया, जिसके कारण प्रतिरोध उत्पन्न हुआ।
3. ओडिशा के रायगढ़ा, मलकानगिरी और कोरापुट जिलों में 2005 से चैता सांस्कृतिक त्यौहार मनाया जाता है जिसका फंडिंग और आयोजन राजकीय प्रशासन द्वारा की जाती है। लेकिन, आदिवासी और उनके संस्कृति के नाम पर आयोजित इस पर्व में आदिवासियों को कोई अहम भूमिका और योगदान नहीं दी जाती है।
4. झारखंड के हजारीबाग जिले में 7 नवंबर को अडानी के ग़ैर-कानूनी जमीन अधिग्रण के खिलाफ बड़कागांव पंचायत में महापंचायत। हजारीबाग के ही करणपुरा ब्लॉक में 83 कोयला ब्लॉक आवंटित हैं जिसके 7 कोयला कोयला ब्लॉक में ही 12 लाख पेड़ करेंगे। अगर यहां खनन होता है तो करणपुरा और बड़कागांव पंचायत और जंगल लुप्त हो जाएंगे।
5. छत्तीसगढ़ के आदिवासी क्षेत्रों में चल रहे केंद्र सरकार के नक्सली-विरोधी ऑपरेशन में बेकसूर आदिवासी ग्रामीणों की हत्या। आदिवासी क्षेत्रों में 3-4 किलोमीटर की दूरी में पुलिस फोर्स लगाया जा रहा है जो आदिवासियों पर निगरानी रख रखती है। आदिवासियों का कहना है, "ये बाहरी पुलिस फोर्स हमसे - जो इस गांव-जंगल में पीढ़ियों से रह हैं; हमारा नाम, गांव और पहचान-पत्र मांगते हैं।"
6. पुलिस फोर्स की भारी मौजूदगी महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्र गढ़चिरौली में भी है। यहां लियोड्स कंपनी द्वारा लोहा निकालने के लिए लगातार पंचायतों पर दबाव बना रही। सरकार "नक्सलियों" का हवाला देकर, प्रोजेक्ट्स की जन सुनवाई गांव में नहीं करती। बल्कि, कलेक्ट्रेट ऑफिस के पास करती जहां बाहरी लोगों को पैसा देकर (और खिला पिलाकर) प्रोजेक्ट्स के लिए फर्जी सहमति के लेकर फर्जी ग्राम सभा की जाती है।
7. गढ़चिरौली में 2023 में 255 दिनों का जनांदोलन भी हुआ था। लेकिन, आंदोलन और प्रोजेक्ट्स के विरोध को रोकने के लिए मुख्य नेताओं और प्रतिनिधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई। यहां तक कि 8 आदिवासी आंदोलनकारियों को हेलीकॉप्टर से उठाकर कर करवाई की गई।
8. "पुलिस प्रशासन पत्रकार" सभी कंपनियों के लिए काम कर रहे है। पुलिस कम्पनियों को सुरक्षा देती है और जो ग्रामीणों अपने जल जंगल घर और खेत की रक्षा करते हैं, उन्हें बल और बंदूक से रोकती है (जैसा कि ओडिशा के लांझीबेरना, गोड्डा के बोरिजोर में खनन के लिए पुलिस बल का इस्तेमाल हुआ)। प्रशासन भी सारे नियम कानून को कंपनियों के हित में तोड़ मरोड़ कर "गैर कानूनी" काम को भी "कानूनी" बना देती है (जैसे कि फर्जी ग्राम सभा की फर्जी अनुमति). पत्रकार भी जन आंदोलन और ग्रामीणों के प्रतिरोध को समाचार में नहीं बता रहे और कंपनी और "विकसित" भारत का गुणगान कर रहे है। कंपनियों द्वारा भ्रष्टाचार और सरकार से जवाबदेही लेने वाले कुछ पत्रकारों पर भी हमला किया जा रहा और उन्हें चुप कराया जा रहा है।
9. झारखंड के पूर्वी सिंहभूम में जमीन की खरीद बिक्री बहुत तेजी से हो रही। जो जमीन पांचवीं अनुसूची में थी, उनपर भी कब्जा किया जा रहा। जंगल को भी खदान और फैक्टरी बनाने के लिए पर्यावरण क्लियरेंस मिल रहा है। जमशेदपुर, जो मुंडाओं को गढ़ था, वहां अब आदिवासियों की जनसंख्या कम हो गई है। टाटा द्वारा विस्थापित लोगों को अभी भी पुनर्वास नहीं किया गया है और मुआवजा नहीं मिला है। दिमला डैम से विस्थापित लोगों की भी यही पीड़ा है।
10. झारखंड के मुंडाओं का एक और गढ़ जहां से जयपक सिंह मुंडा और बिरसा मुंडा जैसे आंदोलनकारी जन्में और लैंडबैंक विरोध जैसा आंदोलन जन्मा, वहां भी खतरा मंडरा रहा है। खूंटी के अड़की ब्लॉक के उलिहातु और जोजोबेरा पंचायत में सोना की पहचान हुई है। 23 नवम्बर को अड़की में बड़ा विरोध हुआ।
10. "विकास" का मॉडल और मापदंड बहुत सीमित है। झारखंड, छत्तीसगढ़ और आदिवासी राज्यों को सिर्फ खनिज और खदान के लिए देखा जा रहा है। जबकि यहां शिक्षा, सेहत और रोजगार की बहुत बुरी स्थिति है। देशभर में अब जंगलों को काटा जा रहा है जो पर्यावरण, बाढ़ और सूखा जैसी आपदा, भुखमरी और बीमारियों को फैला रही है। दिल्ली में अरावली पहाड़ और महाराष्ट्र में आरे जंगल और मैंग्रोव्स को भी काटने की सरकारी अनुमति मिल गई है।
कार्य - योजना
1. ओडिशा के सुंदरगढ़, खंडहर में बैठक कर योजना बनाना
2. घाटशिला में बैठक करना
3. दस्तावेजीकरण करना
4. विभिन्न आंदनलों के नेताओं और समुदायों का साथ देना
5. रांची में मार्च, 2026 में "आदिवासियों, स्वास्थ्य और पर्यावरण" पर राष्ट्रीय बैठक करना।
धन्यवाद,
जस्टिस इन माइनिंग नेटवर्क
बग़ैचा सामाजिक केंद्र
रांची
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