झारखंड -तमाड़ - परासी में खनिज और सामुदायिक अधिकार
तमाड़ उत्तर छोटा नागपुर गनीसिक पहाड़ और दक्षिण में दलमा पर्वत श्रृंखलाएँ से घिरा है.
यहाँ उच्चतम बिंदु की ऊंचाई 484 मीटर है, जबकि सामान्य क्षेत्र की ऊंचाई लगभग 250 मीटर की होती है।
यहाँ मुख्य जल निकासी का नियंत्रण सुवर्णरेखा नदी की सहायक नदी करकरी नदी द्वारा किया जाता है, जो पूर्व और उत्तर पूर्व की ओर बहती है.
i तमाड़ में खनिजों की जानकारी
झारखंड में सोने का 7.2 मिलियन टन का भंडार है।
पूर्वी सिंहभूम में 9.894 लाख टन का सोना भंडार है.
जो तमाड़ तेहसील के परासी के 75 हेक्टेयर क्षेत्रफल में फैला है (Mineral Exploration and Consultancy Limited).
सोने का 9.894 लाख टन दो मुख्य गांव में है : बबाई कुण्डी (अमलेशा पंचायत)
और सिन्दौरी.
यहाँ के सोने की गुणवत्ता 1.055% की है (कटऑफ 0.5%) जो बहुत उच्च दर का है.
परासी स्वर्ण भंडार की पर्यावरणीय मंजूरी के लिए सार्वजनिक सुनवाई रुंगटा माइंस लिमिटेड के प्लांट पर 22.08.2019 को परासी के बजरंगबली चौक के पास खेल के मैदान में ग्राम, थाना तमाड़, में बैठक हुई.
कुल सोने की खदान का पट्टा क्षेत्र 75.273 हेक्टेयर होगा।
उत्पादन खदान की क्षमता 60,006.18 टन प्रति वर्ष और बेनिफिसिएशन प्लांट की क्षमता 200 टन प्रति वर्ष होगी।
खदान को 50 वर्ष के लिए लीज किया जायेगा.
प्रोजेक्ट की लागत 13.63 करोड़ रुपये होगी.
खनन ओपनकास्ट मशीनीकृत विधि से किया जाएगा।
12.80 मिलियन क्यूबिक मीटर कचरा उत्पन्न होगा।
पट्टा क्षेत्र के अंतर्गत पीने, लाभकारी संयंत्र और अन्य के लिए पानी की आवश्यकता संबद्ध गतिविधियाँ प्रति दिन 461 घन मीटर अनुमानित हैं।
उस परियोजना से 109 लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलेगा।
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परासी के अलावा, झारखण्ड में 5 और स्थान में सोना भंडार पर काम चल रहा है:
1. पहाड़िया (पश्चिम सिंघभूम, मनोहरपुर)
2. कुंदरकोचा (पश्चिम सिंघभूम )
3. लावा (चांडिल-सराईकेला-खरसावां)
4. अड़की, पांडेपाइ (खूंटी)
5. जोजेबेरा - उलिहुरंग (खूंटी)
परासी, तमाड़ में सोने के अलावा इन खनिजों का भी भंडार मिला है :
1. लीड (सीसा) - 82.46 टन
2. निकल - 369.54 टन
3. कोबाल्ट- 230.33 टन
4. चांदी - 8.90 टन
5. मॉलिब्डेनम - 98.94 टन
6. टिन - 103.88 टन
7. गैलियम- 102.40 टन
Source: धातु स्क्रैप व्यापार वाणिज्य
इनके अलावा,
1. पाइराइट
2. पाइरोहोटाइट
3. आर्सेनोपाइराइट
4. चाल्कोपीराइट
5. मैग्नेटाइट
6. इल्मेनाइट
7. स्फालराइट आदि हैं।
ii खनिजों के दुष्प्रभाव
1. लीड (सीसा)
सीसा वयस्कों में दीर्घकालिक नुकसान का कारण बनता है, जिसमें उच्च रक्तचाप, हृदय संबंधी समस्याएं और गुर्दे (ह्रदय) की क्षति का खतरा बढ़ जाता है। गर्भवती महिलाओं के सीसे के उच्च स्तर के संपर्क में आने से गर्भपात, मृत बच्चे का जन्म, समय से पहले जन्म और जन्म के समय कम वजन हो सकता है।
2. निकल
निकल से फेफड़ों, पेट और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। निकल के संपर्क में आने से कैंसर हो सकता है।
3. कोबाल्ट
कोबाल्ट से अस्थमा जैसी एलर्जी हो सकती है। भविष्य में इसके संपर्क में आने से सांस की तकलीफ, घरघराहट, खांसी और/या सीने में जकड़न के साथ अस्थमा का दौरा पड़ सकता है। कोबाल्ट हृदय, थायराइड, लीवर और किडनी को प्रभावित कर सकता है। कोबाल्ट धूल के बार-बार संपर्क में आने से फेफड़ों में घाव (फाइब्रोसिस) हो सकता है, भले ही कोई लक्षण नजर न आए.
4. गैलियम
गैलियम एक संक्षारक रसायन है और इसके संपर्क से त्वचा और आंखों में गंभीर जलन और जलन हो सकती है और आंखों को संभावित नुकसान हो सकता है। * साँस लेने पर गैलियम नाक और गले में जलन पैदा कर सकता है जिससे खांसी और घरघराहट हो सकती है। * गैलियम लीवर और किडनी को नुकसान पहुंचा सकता है। * गैलियम तंत्रिका तंत्र और फेफड़ों को प्रभावित कर सकता है।
झारखंड में जो ज्ञात खनिज है उनका जो भंडार है वह इस प्रकार है:
क्र. खनिज भंडार
1. अपटाइट 3.07 मिलियन टन
2. एसबस्ट 1.2 मिलियन टन
3. बेराइट 15,000 टन
4. बॉक्साइट 70 मिलियन टन (चाइना के लिए 45.93 मिलियन टन)
5. क्रोमाइट 3.34 लाख टन
6. कोयला 82,000 मिलियन टन
7. कोबाल्ट 9000 टन
8. तांबा 108.69 मिलियन टन
9. डोलोमाइट 29.864 मिलियन टन
10. फेल्सपार 5.152 मिलियन टन
11. फायरक्ले 50.462 मिलियन टन
12. ब्लैक ग्रेनाइट 46 मिलियन क्यूबिक मीटर
13. कलर ग्रेनाइट 340 मिलियन क्यूबिक मीटर
14. गार्नेट 72,000 टन
15. सोना 7.2 मिलियन टन
16. ग्रेफाइट 389.678 मिलियन टन
17. कायन इट 1.3 मिलियन टन
18. लाइमस्टोन 965 मिलियन टन
19. मैंगनीज 2.363 मिलियन टन
20. अबरक (माइका) 41 मिलियन टन
21. निकेल 9,000 टन
22. सिलिका सैंड 136.429 मिलियन टन
23. क्वाजाइट 219.842 मिलियन टन
24. सोपस्टोन 2,89,000 टन
25. चांदी 8.9 टन
26. नेडियन 25 लाख टन
27. यूरेनियम 40 लाख टन
28. थोरियम दो लाख टन
29. टाइटेनियम ऑक्साइड 7.4 लाख टन
30. कोल बेड मिथेन 15 बिलियन क्यूबिक मीटर
*इन खनिजों में जो अत्यंत लघु खनिज है (जो पत्थर हैं और बालू जो बजरी है) उसकी गिनती नहीं की गई है.
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iii. खनिजों पर समुदाय का अधिकार और समान विकास
इन सभी खनिजों का अगर मूल्य हम बाजार मूल्य के हिसाब से देखते हैं तो यह लगभग 5 हज़ार ट्रिलियन रुपया के आसपास आता है. यह मूल्य जो भारत सरकार के मूल्य हैं उनसे तुलना की गई है. अब यह है कि इस झारखंड प्रदेश की जो पूरी आबादी है, वह लगभग अभी साढ़े करोड़ के आसपास है. असल जो इसकी आबादी है वह है 2011 की गणना के अनुसार 3 करोड़ 29 लाख 8,814 है. इसे आप साढ़े चार के आसपास चार के आसपास मान ले, तो प्रति व्यक्ति जो खनिजों का मूल्य जो भंडार है. जो खनिज भंडार है, उन खनिज भंडार का मूल्य अगर आप निकालेंगे तो वह लगभग डेढ़ सौ करोड़ यानी, एक अरब 50 करोड़ रुपए का आता है. कहने का अर्थ यह है कि इस झारखंड के प्रति व्यक्ति जो खनिज संसाधन का भंडार है उस खनिज संसाधन के भंडार का मूल्य 150 करोड़ रुपए होते हैं और यह पूरा का पूरा खनिज भंडार देश के देशी विदेशी कंपनियों को सौंप दिया गया है.
देश का संविधान जिसमें राज्य के नीति निर्देशक तत्व आता है, 39 बी उसमें स्पष्ट रूप से यह कहा गया है, कि देश को ऐसा कानून बनाना चाहिए जिसमें देश के भौतिक संसाधनों का स्वामित्व और नियंत्रण समुदाय के हाथ में होना चाहिए. परंतु दुर्भाग्य से आज तक इस देश में ऐसा कोई भी शासक नहीं आया या प्रधानमंत्री नहीं आया, या इस तरह के कोई भी पार्टियां जो शासन वाली पार्टियां हैं कोई नहीं आई जो देश के खनिजों का या देश के संसाधनों का स्वामित्व संविधान के हिसाब से लोगों को दे सके. उल्टा इन संसाधनों को देशी विदेशी पूंजीपतियों को देकर देश में जो संविधान का जो प्रस्तावना है जिसमें यह कहा गया है, कि देश को समाजवादी गणराज्य की तरफ बढ़ना चाहिए. वहां ना करके समाजवादी गणराज्य ना बना के पूंजीवादी तानाशाही की तरफ धकेल दिया गया है.
39 बी धारा है इसको लेकर के अगर आप आगे बढ़ेंगे तो, केरला का एक केस आया थ्रेसेअम्मा जैकब वर्सेस माइनिंग डिपार्टमेंट का जिस जो 8 जुलाई 2013 को जिसका फैसला हुआ और उस फैसले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के तीन जज थे- माननीय आर एम लोढ़ा, जे चलमेस्वर और मदन बी लोकुर- इन तीनों ने एक फैसला सुनाया जिसमें यह स्पष्ट रूप से कहा कि देश में ऐसा कोई भी कानून नहीं है जो यह कहता हो कि देश के खनिजों का मालिक सरकार है. उल्टे उन्होंने यह कहा कि देश के खनिज का मालिक वही है जो जमीन का मालिक है, अर्थात इन खनिजों का मालिक भी यहां के स्थानीय निवासी हैं.
अगर इस हिसाब से देखें तो झारखंड का हर व्यक्ति अरबपति होना चाहिए, लेकिन दुर्भाग्य से क्योंकि संविधान के हिसाब से यह देश चल नहीं रहा है, और लोग अपने अधिकारों को समझ नहीं रहे हैं. इस कारण इस झारखंड का 39% व्यक्ति गरीबी रेखा के नीचे है और वह किसी तरह अपना जीवन बसर कर रहा है. दूसरी तरफ इन खनिजों के खनन के कारण झारखंड का प्रतिवर्ष लगभग 30 से 400 हजार व्यक्ति भूमिहीन होते चले जा हैं.
Note: खनिजों की लूट को बेहतर ढंग से समझने के लिए कृपया डॉ मिथिलेश दांगी के यूट्यूब चैनल को देखें
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